Friday, 10 June 2016

कुवैत टु पंजाब..


पति की मौत के बाद मनप्रीत अकेली तो हुई पर उसने अपनी बच्ची को ही अपना जीवन मानकर हारी हुई बाजी लड़नी शुरू की.. सिमरन अब 17 साल की हो गई थी.. अपने रिजल्ट का इंतजार कर रही है.. ताकि आगे की पढ़ाई के बारे में सोच सके...

मनप्रीत की शादी 16 साल की उम्र में ही कर दी गई थी.. घरवालों को अच्छा लड़का मिला, उसकी प्रॉपर्टी और खानदान देखकर उनसे रुका न गया.. और चट मंगनी और पट शादी कर डाली.. शादी के अगले ही साल एक प्यारी सी बिटिया ने घर में जन्म लिया.. और घर खुशियों से भर गया.. कुलजीत की अपने घरवालों से ज्यादा दिन नहीं बनी.. और बाप-बेटे की खटपट से दिलों में दूरियां बढ़ती गईं.. और कुलजीत एक दिन मनप्रीत और अपनी सिमरन को लेकर अपने बनाए मकान में शिफ्ट हो गया..

मनप्रीत भी कुलजीत की दुकान पर बैठकर उसका हाथ बंटा देती थी.. कुलजीत हर सोमवार को दुकान का सामान भरने के लिए थोक मार्केट जाता और पीछे से मनप्रीत और छोटी सी सिमरन दुकान संभाल लेते..

उस सोमवार भी कुलजीत मार्केट गया.. पर जब रात के 9 बजने पर भी नहीं लौटा.. तो मनप्रीत को थोड़ी शंका हुई.. मनप्रीत मन ही मन ऊपरवाले से कुलजीत के लिए दुआ मांगने लगी.. पर जब किसी का वक्त ही पूरा हो गया हो.. तब कोई दुआ काम नहीं आती.. थोड़ी देर बाद ही बुरी खबर आ गई.. कुलजीत के स्कूटर को एक ट्रक वाला टक्कर मारकर चला गया.. कुलजीत मनप्रीत और 4 साल की सिमरन को छोड़कर चला बसा..

तबसे लेकर आज तक सिमरन के लिए हर मुमकिन कोशिश करती आ रही मनप्रीत आज परेशान थी..परेशानी की वजह भी सिमरन ही थी.. सिमरन ने उसे और विनय को एक साथ देख लिया था.. और तब से अजीब व्यवहार करने लगी.. ना टीवी पर ही कुछ देख रही है और ना ही दुकान में जाकर बैठी... बस अपने कमरे को अंदर से बंद कर अकेली बैठी है..

सिमरन को कई बार आवाज लगाकर बाहर बुलाने की कोशिश भी की पर वो बाहर नहीं आई.. मनप्रीत जब हद से ज्यादा परेशान हो गई... तो दुकान बंद कर सिमरन के कमरे के बाहर गई और उसे आवाज लगाकर बाहर आने को कहा.. जोर से दूसरी बार जब दरवाजा खटखटाया.. तो सिमरन ने दरवाजा खोला.. रोती हुई आंखों और रुंधे हुए गले से सिमरन ने अपनी मां का हाथ पकड़ा औऱ कहा, मां मैं विनय से शादी करना चाहती हूं.. मैं उससे प्यार करती हूं..

अपनी लाडली के मुंह से ये बातें सुनते ही मनप्रीत के पैरों तले जमीन खिसक गई.. मनप्रीत को काटो तो खून नहीं.. उसका मुंह पीला पड़ गया.. और धड़ाम की आवाज के साथ वो जमीन पर गिर गई.. सिमरन जोर से चिल्लाई.. मां उठो.. मां तुम्हे क्या हो गया है.. मां कुछ तो बोलो..

मुंह पर पानी के छीटों की ठंडक के साथ मनप्रीत ने आंखें खोली.. सामने सिमरन बैठी थी.. मनप्रीत ने सिमरन से कुछ खाने के लिए बनाने को कहा.. और सिमरन के जाते ही.. एक बार फिर आंख बंद कर सोचने लगी.. उसकी आंखों के आगे विनय का चेहरा घूम रहा था..

वो पहली बार जब उसने विनय को फेसबुक पर देखा.. और फिर उसको अपना फ्रेंड बना लिया... तब विनय कुवैत में रहता था.. कुछ दिन बातें करने के बाद ही दोनों के बीच दोस्ती गहरी हो गई थी.. मनप्रीत का फेसबुक अकाउंट खुलवाकर सिमरन ने ही उसे चैट और दोस्ती करना सिखाया था.. और विनय जैसा दोस्त बनाकर मनप्रीत को अपने सूने जीवन में 13 साल बाद एक बार फिर बहार आती दिखाई दे रही थी..

उसके बाद विनय भारत लौट आया.. और फिर मनप्रीत से मिलने पंजाब आया.. दोस्ती गहरी होती गई.. और विनय मनप्रीत के घर ही किराए पर रहकर अपना बिजनेस करने लगा.. सिमरन के स्कूल के कुछ ही महीने बचे थे जब विनय उनके घर शिफ्ट हुआ था.. शाम को विनय खाली होता तो सिमरन को कुछ पढ़ा देता.. और दोपहर में जब सिमरन स्कूल में होती.. तब मनप्रीत और विनय का रिश्ता और गाढ़ा होता गया.. मनप्रीत अब विनय से शादी करना चाहती थी.. और बस सही समय आने पर वो अपनी बेटी को इस बारे में बता देना चाहती थी..

मनप्रीत की आंखों में आंसू देखकर... सामने खिचड़ी लिए खड़ी सिमरन ने मां से खाने को कहा.. मनप्रीत ने बैठते हुए सिमरन के हाथों से खिचड़ी ली.. औऱ खाते-खाते मनप्रीत से कहा, बेटा मैं तुझसे कुछ छिपाना नहीं चाहती थी.. तूने आज अचानक ही देख लिया.. मैं और विनय शादी करनेवाले हैं..

ये सुनते ही सिमरन जोर से चिल्ला उठी.. मां ये कैसी बातें कर रही हो.. विनय मुझसे प्यार करता है.. और हम दोनों जल्द ही शादी करनेवाले हैं.. बस मेरे 18 साल का होने का इंतजार है.. आप इस उम्र में ये कैसी बातें कर रही हो..

बेटी के मुंह से ये बातें सुनकर आश्चर्यचकित मनप्रीत ने पूछा इस उम्र का क्या मतलब है.. मेरी उम्र ही क्या है और ये जितनी भी गुजरी है तेरी परवरिश में.. तेरे पिता के जाने के बाद ही शादी कर लेती तो सौतेला बाप तेरा क्या करता बस ये सोचकर मैंने नहीं की.. अब जब कोई ऐसा मिल गया है तो तू ऐसी बातें क्यों कर रही है.. अपनी और उसकी उम्र देखी है.. और फिर तू अभी बच्ची है. तुझे क्या पता प्यार क्या होता है.. बेटा हम तेरे लिए एक अच्छा सा लड़का ढूंढ लेंगे..

सिमरन के सिर पर मानों भूत सवार हो गया.. सिमरन चिल्लाते हुए बोली.. मुझे बेवकूफ समझती हो क्या.. मैंने सब देखा.. पर मेरे प्यार के आगे ये कुछ भी नहीं है.. मैं विनय से शादी करने के लिए कुछ भी कर सकती हूं.. और पास ही पड़े चाकू को उठाकर सिमरन ने अपनी कलाई पर अंग्रेजी में विनय गोद लिया..

अब मनप्रीत चुप हो गई.. सिमरन के जाते ही उसने विनय को फोन लगाया.. विनय काम से बाहर गया हुआ था.. अगली सुबह जब विनय लौटा तो सिमरन स्कूल जा चुकी थी.. मनप्रीत और विनय ने आपस में  बात की और फिर शाम होते-होते विनय काम से बाहर चला गया.. विनय को काम से चंडीगढ़ जाना था.. रात में दोनों मां बेटी ने कुछ नहीं खाया.. और अपने-अपने कमरों में सोने को चली गईं.. सिमरन काफी उदास थी.. और मनप्रीत लगातार थोड़ी-थोड़ी देर में अपने फोन पर किसी से बात कर रही थी..

सुबह होते ही मनप्रीत ने रोज की तरह सिमरन उठ जा की आवाज लगाई.. पर हर रोज की तरह सिमरन की हां नहीं आई.. 3-4 बार चिल्लाने पर भी जब जवाब नहीं आया.. तो झल्लाकर मनप्रीत अपने बिस्तर से उठी औऱ बड़बड़ाती हुई उसके कमरे के बाहर आई.. दरवाजे को खोलने के लिए हाथ मारा.. और चिल्ला पड़ी... सिम्मू.. ये क्या कर लिया तूने..

सिमरन की लाश पंखे से लटक रही थी.. उसने अपने ही दुपट्टे से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी.. मनप्रीत ने पुलिस को फोन कर बुलाया.. पुलिस के आने के बाद विनय को भी फोन किया गया.. सिमरन की लाश के बगल से एक सूसाइड नोट मिला.. जिसमें उसने आत्महत्या की वजह अपने दादा-दादी से जायदाद को लेकर विवाद बताया.. औऱ अपनी मां और खुद को हक ना देने की वजह से दादा-दादी को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था..

मनप्रीत का रो-रोकर बुरा हाल था.. विनय किसी तरह उसे संभाल रहा था.. पुलिसकर्मी सिमरन का कमरा टटोल रहे थे.. मौजूद पुलिसकर्मियों में से एक मोहल्ले में ही रहा करता था.. उसने मनप्रीत से विनय के बारे में पूछा.. भाभीजी ये कौन भाईसाहब हैं.. पहले कभी नहीं देखा.. मनप्रीत ने संभलते हुए बताया कि हमारे घर पर किराएदार हैं..

पुलिसवाले प्रभजोत सिंह ने विनय से नाम औऱ काम पूछा... फिर कुछ सोचता हुआ मुड़ गया.. लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाया गया.. और पुलिसवाले घर से निकल गए.. मनप्रीत के घर पर रिश्तेदारों और मोहल्लेवालों का तांता लग गया.. सब उसे सांत्वना देते हुए संभालने की कोशिश करने लगे.. लेकिन थोड़ी ही देर में पुलिस लौटी और विनय को साथ चलने को कहा..

हैरान विनय ने वजह पूछी.. तो प्रभजोत ने जोर का चांटा लगाया.. और बोला.. साले तूने क्या हमें भाभीजी की तरह बेवकूफ समझा है.. सिमरन के हाथ पर एक बार नजर तो मार लेते.. पोस्टमॉर्टम के लिए अभी तो ले ही जा रहे थे.. रास्ते में उसके हाथ पर तेरा नाम गुदा हुआ देखा.. चल अब तुझे आगे की कार्रवाई थाने में ही बताऊंगा.. मेरी बेटी की तरह थी सिमरन..

बाद में पुलिस मनप्रीत को भी ले गई.. दोनों पर हत्या का मुकदमा चला.. औऱ दोनों को उम्रकैद की सजा दी गई.. फिलहाल दोनों जेल में बंद हैं.. पर फेसबुक पर प्यार का ये ट्राइऐंगल.. एक मां को अपनी बेटी का कातिल बना गया..




Thursday, 9 June 2016

फेसबुक पर प्यार, ठेली लगाने को भी तैयार


गर्मी बढ़ती जा रही थी.. जून का महीना जान लेने पर तुला था.. पर सोफिया के लिए तो हर मौसम एक जैसा था.. गर्मी ज्यादा.. तो एसी की कूलिंग बढ़ाकर डबल बेड के एसी की तरफ वाले किनारे पर ही सोती थी सोफिया.. दोनों बहनों में इस बात की लड़ाई न हो इसीलिए एक एग्रीमेंट साइन किया गया.. जिसके मुताबिक जो पहले खाना खत्म कर बिस्तर पर लेट जाएगा.. फिर वो ही उस रात वहां सोएगा.. अब इस चक्कर में शुरुआत में तो कई बार भूखा ही सोना पड़ा.. सोफिया अपनी बहन शबाना से बड़ी जरूर थी.. पर इस मामले में कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं..

भई गर्मी इत्ती है.. साला इसमें भी बड़प्पन दिखाने लगेंगे.. तो फिर जी लिए..
मां के 'बड़ी हो' वाले मुहावरे पर सोफिया की तरफ से करारा जवाब था ये..

सोने के मामले में सोफिया को किसी तरह की कोई कमी बर्दाश्त नहीं थी.. आराम से.. एसी में..और जब तक मन चाहे सोना.. इसीलिए उसकी छोटी बहन उसे स्लीपिंग ब्यूटी कहती थी..

सोकर उठते ही सोफिया की सबसे पहली जरूरत थी उसका फोन.. औऱ फोन अनलॉक होते ही अपने एन्ड्रायड पर वो सीधे फेसबुक वाले ऐपलिकेशन को खोलकर नोटिफिकेशन चेक करती... न्यूज अब केंद्रित होकर पर्सनल हो गई है.. फेसबुक का न्यूज फीड सोफिया के लिए किसी नामी चैनल या अखबार से कम थोड़े ही था..

बीटेक के फाइनल ईय़र की स्टूडेंट सोफिया के मुताबिक खबर उसी की रखनी चाहिए जिसकी जरूरी हो.. औऱ सोफिया के लिए उसके वर्चुअल फ्रेंडल सबसे ज्यादा जरूरी थे.. हर दिन की तरह सोफिया ने उस दिन भी अपना फोन उठाया औऱ उसपर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट देखी.. फ्रेंड रिक्वेस्ट मध्य प्रदेश से एक स्मार्ट से लड़के की थी.. सोफिया ने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने से पहले जरूरी चेक किए.. उसकी टाइमलाइन देखी.. और फिर रहने दो सोचकर छोड़ दी..

एक के बाद एक हर दिन उस लड़के के मेसेज आने लगे औऱ सोफिया ने एक दिन सतीश की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ही ली.. सतीश के प्रोफाइल के मुताबिक वो एक बिजनेसमैन था.. ग्रैजुएट सतीश उसके रोमन हिंदी में चैट करता. और धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती बढ़ती गई.. फिर एक दिन सतीश ने सोफिया से उसका फोन नंबर मांगा.. कुछ दिन ना-नुकुर करने के बाद सोफिया ने ये भी कर दिया.. और फिर दिन में दो तीन बार बात होने से शुरू हुआ सिलसिला घंटों बातें करने में तब्दील हो गया..

सतीश और सोफिया को एक दूसरे से बात करना अच्छा लगने लगा.. अब सोफिया सोने के लिए झगड़े नहीं करती थी.. क्योंकि उसे फोन पर बात करनी होती.. सुबह देर से उठने वाली सोफिया को सतीश सुबह 8 बजे फोन कर उठा देता था.. थोड़ा कूं-कां करने के बाद सोफिया उठ ही जाती.. प्यार जो ना कराए.. सोफिया को सुबह उठते ही किसी से बात करना पसंद नहीं था.. लेकिन सतीश की आवाज उसे बेहद पसंद थी..

सोफिया की मां ने उससे रात देर तक फोन पर बात करने की वजह पूछकर डांट दिया.. और बस उसके बाद अगले ही दिन से सोफिया के रिश्ते की बात की जाने लगी..

अब सुबह उठते ही सोफिया ने सतीश को फोन लगाया औऱ उसे अपने घर का हाल बताया.. सतीश ने तपाक से सोफिया से शादी की बात कह डाली... सोफिया को तो जैसे इसी बात का ही इंतजार था.. दोनों ने मिलने की जगह तय कर ली..सोफिया ने अपने मां-बाप को बताए बगैर टिकट बुक की.. और फ्लाइट से पहुंच गई इंदौर.. दोनों मिले और वहां से सतीश उसे अपने घर ले गया..

सतीश का घर 2 कमरों का था.. जिसमें एक कमरे में उसके माता-पिता और वो सोते थे और दूसरे कमरे में दो कुर्सियां-टेबल और एक टीवी रखा था.. सोफिया ने सतीश के माता पिता के पैर छुए.. सोफिया को लेकर आंगन में बैठे सतीश ने सोफिया से कहाअभी तक तुम मेरे बारे में पूरी सच्चाई नहीं जानतीं.. तुम्हे पता है मैं क्या करता हूं..

सोफिया ने फेसबुक की अपनी तहकीकात के मुताबिक तपाक से कहा बिजनेस

सतीश ने कहा हां.. और वो बिजनेस है.. सब्जी की रेहड़ी.. मैं बाजार में रेहड़ी पर सब्जी लगाता हूं.. खाने लायक पैसे कमा लेता हूं.. और ग्रैजुएट हूं.. बस लेकिन इससे ज्यादा नहीं..

सोफिया कुछ देर चुपचाप बैठी उसे देखती रही.. फिर बोली.. इतना बहुत है.. और क्या चाहिए..

अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि पुलिस आंगन में आ पहुंची.. सोफिया के पिता ने उसके किडनैप की एफआईआर दर्ज कराई थी... पुलिस सोफिया औऱ सतीश को थाने ले गई औऱ सोफिया के पिता को इत्तला दे दी गई..

सोफिया के पिता अगली ही फ्लाइट से इंदौर पहुच गए.. थाने पहुंचते ही उन्होने सोफिया के कान के नीचे दो थप्पड रसीद कर दिए.. पुलिसवाला बोलता ही रह गया कि लड़की बालिग है अपनी मर्जी से आई है.. सोफिया के होंठ से खून निकल रहा था.. अपने दुपट्टे से पोंछ कर सोफिया चुपचाप सुबकने लगी..

बिरादरी में नाक कटा दी है इसने.. एक तो लड़का अपने मजहब का नहीं औऱ उसपर कम से कम खाना-कमाना तो देख लिया होता..इससे अच्छा है कि तू पैदा ही न हुई होती.. सोफिया के पिता ने कहा

सतीश चुपचाप खड़ा सब देख रहा था.. उसने नमस्ते की.. तो सोफिया के पिता ने उसे ऐसे इग्नोर कर दिया जैसे सतीश वहां हो ही ना..

सोफिया ने अपने पिता के सामने हाथ जोड़े और कहा कि मैं इसी के साथ शादी करना चाहती हूं.. और अब यहीं रहूंगी..

(अपनी लाडली बेटी के मुंह से ये सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए)

इतना सुनते ही, सोफिया के पिताजी ने पुलिसवाले की तरफ देखा.. पुलिसवाले ने बालिग होने वाली बात दोहरा कर.. अपनी नाराजगी जताई.. सोफिया के पिता कुर्सी से खड़े हुए औऱ उसकी तरफ देखकर बोले.. मर गई तू..जो मन हो वो कर.. औऱ चले गए..

बस तब से आज तक.. सोफिया  औऱ सतीश साथ रह रहे हैं.. प्यार है भई.. और सब तो आ ही जाएगा..

Wednesday, 8 June 2016

सच्चा प्यार है ये.. फेसबुक की कसम

वैसे तो प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती.. पर फेसबुक के आ जाने से लव पूरी तरह से ब्लाइंड हो गया है..
फेसबुक ने लोगों के जीवन में कई तरह से घुसपैठ की है.. सोते-जागते अपडेट से लेकर.. धोते-पोंछते की सेल्फी तक.. पर लोगों के इमोशन्स को जिस तरह से फेसबुक ने मॉनेटाइज किया है.. शायद ही किसी औऱ ने कभी किया हो..खैर ये तो हो गया.. नाम के बारे में.. अब काम की बात..

आपको इस ब्लॉग कम Online Free का Novel में फेसबुक के अलग-अलग प्यार के एनकाउंटर बताऊंगा.. वादा ये है कि ये एनकाउंटर फेक नहीं होंगे.. पर हां सबकी आइडेंटिटी सेफ रखी जाएगी..कहानी सबकी होगी.. इसकी-उसकी-सबकी.. पर नाम नहीं बताएंगे.. मतलब नहीं बताएंगे..मुंह नहीं खोलेंगे.. भेज देना जैसी भी हो आपकी या आपके किसी जानकार की कहानी.. फिर थोड़ा नमक-मिर्च डालकर.. धीमी आंच में पकाकर.. बढ़िया ड्रेसिंग के साथ पेश करेंगे आपके पास..

तो लगे रहिए.. औऱ पढ़ते रहिए.. दिमाग और दिल दोनों खराब हो जाएंगे..